Suraj Ka Asali Rang Kya Hai ?

जब हम आसमान की ओर देखते हैं, तो हमें सूरज अक्सर पीले, नारंगी या कभी-कभी लाल रंग का दिखाई देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि Suraj Ka Asali Rang Kya Hai ? क्या वह वाकई में पीला है, या कुछ और? इस सवाल का जवाब विज्ञान में छिपा है, और यह काफी दिलचस्प है।

अंतरिक्ष से सूरज कैसा दिखता है?

अगर कोई अंतरिक्ष यात्री सूरज को पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर से देखे, तो उसे सूरज सफेद दिखाई देगा। वहां कोई वायुमंडलीय प्रभाव नहीं होता, जिससे रंग बदल जाए। इस बात की पुष्टि नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों की तस्वीरों से भी होती है।

सूरज कैसा दिखता है?

हम पृथ्वी से सूरज को जिस रंग में देखते हैं, वह पूरी तरह से वायुमंडल पर निर्भर करता है। जैसे-जैसे सूरज की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती है, वैसे-वैसे उसमें मौजूद गैसें और कण उस प्रकाश को बिखेरते हैं (इस प्रक्रिया को “scattering” कहा जाता है)। यही कारण है कि सूरज सुबह या शाम को लाल या नारंगी दिखता है और दिन में थोड़ा पीला

सूरज की रोशनी का विज्ञान

सूरज की रोशनी को अगर हम एक प्रिज्म से गुजारें, तो वह सात रंगों में बिखर जाती है — लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो और बैंगनी। ये सभी रंग मिलकर जो प्रकाश बनाते हैं, उसे हम “सफेद प्रकाश” कहते हैं।
इसका मतलब यह है कि सूरज की असली रोशनी सफेद है, न कि पीली।

सूरज पीला क्यों है?

जब सूरज की रोशनी पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करती है, तो नीली और बैंगनी किरणें ज्यादा बिखर जाती हैं, और पीली-नारंगी किरणें हमारी आंखों तक पहुंचती हैं। यही कारण है कि दिन के समय सूरज हमें पीला दिखता है।

सूर्य को तारा क्यों कहा जाता है?

परिभाषा के अनुसार सूर्य एक तारा है

खगोलशास्त्र में “तारा” (Star) उसे कहा जाता है जो:

  • खुद से ऊर्जा उत्पन्न करता है,
  • वह ऊर्जा नाभिकीय संलयन (nuclear fusion) के माध्यम से पैदा होती है,
  • और यह ऊर्जा प्रकाश और गर्मी के रूप में चारों ओर फैलती है।

सूर्य भी यही करता है। उसके केंद्र में हाइड्रोजन गैस हीलियम में बदलती है और इस प्रक्रिया में बहुत अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो हमें गर्मी और रोशनी के रूप में मिलती है।

अन्य तारे भी सूरज जैसे ही होते हैं

जो तारे आप रात में देखते हैं, वे भी सूरज जैसे ही हैं — फर्क बस इतना है कि वे हमसे बहुत दूर हैं, इसलिए वे छोटे और टिमटिमाते हुए दिखते हैं।

अगर सूरज भी बहुत दूर होता, तो वह भी एक टिमटिमाता तारा ही लगता।

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